शक्तिपीठ - हृदय पीठ

पूर्वोत्तरे प्रज्वलिकानिधाने, सदावसन्तं गिरिजासमेतं ।
सुरासुराराधित्पाद्य्पद्मं श्री बैद्यनाथं तमहं नमामि ।।

शक्तिपीठ - हृदय पीठ

देवघर शक्तिपीठ भी है, यह हृदयपीठ कहलाता है। इसकी ऐतिहासिक धारणा धार्मिक साहित्य के आधार दक्ष यज्ञ से जुड़ी है।

जब माता सती वहां गईं और पिता के मुख से पति का अनादर सुना तो यज्ञ कुंड में कूद गईं। उसके बाद तो हाहाकार मच गया। शिव सुनते ही वहां पहुंचे। क्रोधित होकर सती के मृत शरीर को कंधे पर लेकर तांडव करने लगे। तब विष्णु ने अपने चक्र से सती के मृत देह को 52 हिस्सों में काट डाला। वह जिस जिस स्थान पर गिरा वही शक्तिपीठ कहलाया।

Shakti Peeth  Temple at Baidyanath is the place where Sati’s Heart had fallen. Since the heart of Sati fell here, the place is also known as Hridaya Peeth. Baidyanath Shakti Peeth is the not just a Shakti Peeth, but also, an auspicious place where a person gets relieved from all diseases. It is believed that the person who visits this place, gets cured from all sorts of disease, and all kinds of sins. Bad or negative thoughts are removed from a person’s mind. The individual attains a higher level of Spiritual consciousness. Hence, it is called Baidyanath.

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