बैद्यनाथधाम

पूर्वोत्तरे प्रज्वलिकानिधाने, सदावसन्तं गिरिजासमेतं ।
सुरासुराराधित्पाद्य्पद्मं श्री बैद्यनाथं तमहं नमामि ।।
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बैद्यनाथधाम

विश्व प्रसिद्ध तीर्थ नगरी बैद्यनाथधाम झारखंड राज्य के देवघर जिला मुख्यालय मे स्थितः है। ज्योतिर्लिंगों मे यह पाँचवे क्रम मे है, पुरातन काल से ये स्थान बेहद रमणीय और पवित्र माना गया है। इस पावन स्थली पर माँ पार्वती के हृदय गिरने के कारण इस शक्ति पीठों मे श्रेष्ठ हृदय पीठ की संज्ञा प्राप्त है. 

The Matsyapuran narrates the place as Arogya Baidyanathitee, the holy place where Shakti lives and assists Shiva in freeing people from incurable diseases. This whole area of Deoghar was under the rule of the Kings of Gidhaur who were much attached with this temple.

जबकि इस पवित्र भूमि के साथ कई ऐसे किंवदंतियां जुड़ी हैं, इतिहास भी इसके महत्व को साबित करता है। गुप्त वंश के अंतिम राजा, आदित्यसेन गुप्त के शासन के दौरान 8 वीं शताब्दी ईस्वी से मंदिर का उल्लेख मिलता है। मुगल काल के दौरान, अंबर के शासक, राजा मान सिंह, के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने यहां एक तालाब बनवाया था, जिसे मानसरोवर के नाम से जाना जाता है। मंदिर का मुख पूर्व की ओर है और यह एक पिरामिड के समान बुर्ज की तरह एक पत्थर की संरचना है, जो 72 फीट ऊंचा है। इसके ऊपर तीन सोने के बर्तन गढ़े हैं, साथ में एक पंचशूल (एक त्रिशूल के आकार में पांच चाकू) हैं। चंद्रकांता मणि नामक एक आठ पंखुड़ियों वाला कमल भी है।

कथा:
पौराणिक कथा मे वर्णित है की दैत्य राज रावण के कठोर तपस्या से प्रसन्न हो देवधिदेव महादेव ने उसे अपना आत्म लिंग प्रदान कर दिया, और साथ मे ये शर्त रख दी की जिस भी स्थान पर ये लिंग धरती का स्पर्श करेगा, ये वहीं स्थापित हो जायेगा । आत्म लिंग रावण जैसे असुर को दिए जाने से माता पार्वती अप्रसन्न हो गई थीं , साथ साथ ये चिंता भी थी की इस आत्म लिंग को प्राप्त करने से रावण अजेय हो जायेगा । अतः योजनानुसार रावण के कमंडलु मे वरुण प्रवेश कर गए, उस जल के पीने से बीच रास्ते रावण को लघुशंका की तीव्र इच्छा हुई, उसने अपने पुष्पक विमान को नीचे उतारा तो अपने को एक निर्जन स्थान (देवघर ) पर पाया, और तभी चरवाहे के छद्म वेश मे भगवान विष्णु वहाँ पहुँच गए, और कोई उपाय न देखते हुए रावण ने उस आत्म लिंग को चरवाहे को सौंप जल्द लौटने को कह अपने को निवृत्त करने चला गया, इस बीच चरवाहे ने शिवलिङ्ग को धरती पर रख दिया। लघुशंका से लौटने पर रावण ने शिवलिङ्ग को धरती पर रखा पाया, बहुत प्रयास करने पर भी वह शिवलिङ्ग को नहीं उठा पाया, अपने साथ छल हुआ देख वह अत्यंत क्रोधित हो शिवलिंग को अपने अंगूठे से दबा दिया जिसके निशान आज भी इस शिवलिङ्ग पर हैं।

यात्रा साधन:
बैद्यनाथधाम, अक्षांश 24.4852 तथा देशान्तर 86.6948 पर स्थितः है। निकटतम रेलवे स्टेशन 6 की मी दूरी पर जसीडीह (दिल्ली हावड़ा मेन लाइन) है, निकट हवाई अड्डे कोलकाता, पटना तथा रांची मे क्रमशः 350, 250, तथा 280 की मी दूरी पर हैं। सड़क मार्ग से बैद्यनाथधाम सभी प्रमुख शहरों तथा राज्य / राष्ट्रीय मार्गों से जुड़ा हुआ है।

पर्यटन स्थल:
बैद्यनाथधाम के निकट कई महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल मौजूद है जिनमे धार्मिक तथा प्राकृतिक रूप से जाने जाते है, जीने प्रमुख हैं हरलाजोरी, त्रिकुट पर्वत, नंदन पहाड़, नवलखा मंदिर, रिखीय पीठ, हाथी पहाड़, तपोवन, सत्संगनगर, देवसंघ इत्यादि । 

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